तड़पती तरसती
उन निगाहों ने
मुस्कुराना छोड़ दिया
जिस दिन
उसने अपना घर, अपना देश
अपना आँगन छोड़ दिया

ठहरती फिसलती
उन क़दमों ने
खुशियां ढूँढना छोड़ दिया
जिस दिन
उसने अपना घर, अपना देश
अपना आँगन छोड़ दिया

रोती सिसकती
उन आँखों ने
सपने देखना छोड़ दिया
जिस दिन
उसने अपना घर, अपना देश
अपना आँगन छोड़ दिया

बेचैन सहमी
उन धड़कनों ने
चेहेकना छोड़ दिया
जिस दिन
उसने अपना घर, अपना देश
अपना आँगन छोड़ दिया

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This is my first published Hindi poem. And I am anxious to know what you think.
It is dedicated to women around the world who leave their own happy worlds behind to embrace what lies ahead in the next phase of their lives post marriage.
Do share your thoughts.

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Asha Seth