एक छत के नीचे…

सुबह जब घर से निकलता उसका चेहरा दिल में लिए चलता रास्ते भर यही सोचता कब तक ऐसे चलेगा फटे पुराने चप्पल रास्तों से लड़ते इसी तरह रोज़ गुज़ारे की तलाश में दिन से रात रात से दिन करता शाम को जब घर लौटता वो बैठी रहती पैर पसारे मेरा इंतज़ार करते मुझे देख मुस्कुराती... Continue Reading →

Advertisements

कभी जो…

कभी जो नज़रें मिलीं पलकें झुका न लेना कभी जो मेरी यादों ने दस्तक दी उन्हें ठुकरा न देना उम्मीद लिए देहलीज़ पर खड़ा हूँ इस इंतज़ार में कब मेरी गली से गुज़रोगे कभी जो मेरी आवाज़ सुनो अजनबी कहकर मेरा शहर छोड़ न देना ~~~~~ आशा सेठ

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: