एक छत के नीचे…

सुबह जब घर से निकलता उसका चेहरा दिल में लिए चलता रास्ते भर यही सोचता कब तक ऐसे चलेगा फटे पुराने चप्पल रास्तों से लड़ते इसी तरह रोज़ गुज़ारे की तलाश में दिन से रात रात से दिन करता शाम को जब घर लौटता वो बैठी रहती पैर पसारे मेरा इंतज़ार करते मुझे देख मुस्कुराती... Continue Reading →

Advertisements

मत कहो…

मत कहो यह किस्मत की बात है... जहां बारातों में हज़ारों के निवाले कूड़े दान को खिलाये जा रहे हैं पर एक पिता अपने परिवार को दो वक़्त की रोटी तक को खून बहा रहा है मत कहो यह किस्मत की बात है... की बंद घरों में दीवारों पे लटकी तसवीरें घंटो ऐसी का हवा... Continue Reading →

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: