उस रोज़…

उस रोज़ जब नींद ने अलविदा कहा ऐसा लगा बरसों पुराने किसी दोस्त से बिछड़ना हुआ खुद को जब आईने में देखा ऐसा लगा किसी अजनबी से मुलाकात हुई हस्ते हुए चेहरे के पीछे उस अक्स को पहचान न सकी आंगन में कबूतरों की गुटर गु कुछ नागवार सी लगी उनकी आवाज़ उदासीन सी लगी... Continue Reading →

पतझड़ और वो…

जब मिले हम उस पतझड़ से कुछ इस कदर डूबे उसकी ख़ूबसूरती में की यह पूछना भूल गए वह आएंगे भी या बस उनकी यादें साथ लाये हो उसकी बाहों में सिमट यह बोलना भूल गए इंतज़ार हमें वो करवाते हैं पर हमारी तन्हाई को सीने से तुम लगा लेते हो ~~~~~ आशा सेठ

वो पापा ही थे …

बारिश की उन रातों में डूबे हुए नम यादों में घूँट घूँट उन घंटों को पीते थे हाँ, वो पापा ही थे सुबह की न होश न खबर सूरज की किरणों से परहेज कर खाली बोतलों में अधूरे सपनों को समेटते थे हाँ, वो पापा ही थे ख्वाहिशों की शैय्या से दूर बुने अपने बेशर्त... Continue Reading →

जब निकले खुदको ढूंढने…

हर पल तेरी ही यादों में खोये जाने कब हम खुदसे ही बेगाने हुए शब्द तो मेरे थे पर ज़िक्र तेरा शहर तो मेरा था पर बसेरा तेरा जब निकले खुदको ढूंढने हर गली में मुलाकात हुई तुझसे सोचा तुझसे ही खुद का पता पूछ लूँ पर तेरी गलियों में इस कदर गुम हुए मानो... Continue Reading →

ख्वाहिश बस इतनी सी थी…

रात की खामोशियों को चीरती हुई एक आवाज़ गूंजी जानी पहचानी सी उस शोर की तलाश में कदम मेरे कभी अंधेरों का पीछे करते कभी तेरी यादों का ~~~ सन्नाटों से लैस एक चौराहे पर फिर दूर खड़ी तेरी परछाई मुझे देख मुस्कुरायी हज़ारों सवाल लिए मेरी नज़रें तेरा मन टटोलती रहीं सेहमी सी तेरी... Continue Reading →

उस रात की बात …

क्या बताएं तुम्हें उस रात की बात चौखट पे बैठे अतीत की चादर में लिपटे किस कदर हम ख्वाहिशों को तरसे ~~~ क्या बताएं तुम्हें उस रात की बात होठों को सीए खामोशियों की बाहों में सिमटे किस कदर हम अल्फ़ाज़ को तरसे ~~~ क्या बताएं तुम्हे उस रात की बात खुद से गुफ्तगू करते... Continue Reading →

आज भी…

यादों की जीर्ण दीवारों पर आज भी तस्वीर तेरी लगी है कुछ चंद लम्हों को संजोती आज भी निगाहों में नमी हैं रात की बेसब्र खामोशियों में आज भी सदाएं तेरी गूंजती हैं कुछ चंद लम्हों को संजोती आज भी निगाहों में नमी हैं मौसम के रंगीन चेहरों पर आज भी अक्स तेरी सजी है कुछ... Continue Reading →

एक शाम वक़्त के नाम…

कई सुबह कई शामें गुजरीं वक़्त के कदम कभी न रुके एक पल में सदियाँ बदल गयीं कई सदियाँ एक पल में सिमटे ~~~ इस पहेली में गुम यह सोचा ज़रा फुर्सत से बैठें वक़्त को मुट्ठी में थाम उससे दो बातें करें हमने कहा: "आओ, ज़रा बैठो कुछ किस्से हमें भी सुनाओ अनकहे अनसुने... Continue Reading →

जिस दिन उसने …

तड़पती तरसती उन निगाहों ने मुस्कुराना छोड़ दिया जिस दिन उसने अपना घर, अपना देश अपना आँगन छोड़ दिया ठहरती फिसलती उन क़दमों ने खुशियां ढूँढना छोड़ दिया जिस दिन उसने अपना घर, अपना देश अपना आँगन छोड़ दिया रोती सिसकती उन आँखों ने सपने देखना छोड़ दिया जिस दिन उसने अपना घर, अपना देश... Continue Reading →

A Brief Hiatus

**Disclaimer** This is only for those who really care to read about the author’s unplanned break from blogging. ************************************************************************************* Dear reader, I have been away, for quite some time. Yes, I should have left you a note, like a quick post it or something, letting you know that I won’t be around. And trust me,... Continue Reading →

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