Just the way you are…

like a snake shedding its skin shed yours i know it’s fake be bereaved of pretentions crawl under my skin creep into my veins breathe to the tune of my heart’s beat for only then you’ll know i need you body and soul minus your masks minus your deceits minus your longing to come clean like a prisoner... Continue Reading →

Blank Stares

when he looked at me it felt as though  he was trying to solve a mystery in the beginning, I wanted more much more than them blank stares they didn’t make sense why wouldn’t he say why not even try steal glances, he did but in the moment that our gazes met I swear, I... Continue Reading →

Indifference

it doesn’t matter  whether days fuse into nights or seas dissolve into the skies you carry on breathing the same air eating the same dust as the day you were born like the day after you die ~~~~~ Asha Seth

पतझड़ और वो…

जब मिले हम उस पतझड़ से कुछ इस कदर डूबे उसकी ख़ूबसूरती में की यह पूछना भूल गए वह आएंगे भी या बस उनकी यादें साथ लाये हो उसकी बाहों में सिमट यह बोलना भूल गए इंतज़ार हमें वो करवाते हैं पर हमारी तन्हाई को सीने से तुम लगा लेते हो ~~~~~ आशा सेठ

No Home for My Poem…

cut me open there’s no blood left to spill veins will only squirt dejected hopes rip me limb to limb only words will tumble forth stories waiting to escape will find their way out to the hearts of those who doubted disbelieved and when I am dead my parodies will sing for me because in... Continue Reading →

वो पापा ही थे …

बारिश की उन रातों में डूबे हुए नम यादों में घूँट घूँट उन घंटों को पीते थे हाँ, वो पापा ही थे सुबह की न होश न खबर सूरज की किरणों से परहेज कर खाली बोतलों में अधूरे सपनों को समेटते थे हाँ, वो पापा ही थे ख्वाहिशों की शैय्या से दूर बुने अपने बेशर्त... Continue Reading →

Let’s start again?

maybe I’ll forget  all that you said maybe you’ll forget  all that I did maybe I was wrong  and you were right maybe you were the one who always ended our fights maybe I never wanted to let you go maybe you never wanted to have me back and maybe, amidst all these maybes we... Continue Reading →

आज भी…

यादों की जीर्ण दीवारों पर आज भी तस्वीर तेरी लगी है कुछ चंद लम्हों को संजोती आज भी निगाहों में नमी हैं रात की बेसब्र खामोशियों में आज भी सदाएं तेरी गूंजती हैं कुछ चंद लम्हों को संजोती आज भी निगाहों में नमी हैं मौसम के रंगीन चेहरों पर आज भी अक्स तेरी सजी है कुछ... Continue Reading →

एक शाम वक़्त के नाम…

कई सुबह कई शामें गुजरीं वक़्त के कदम कभी न रुके एक पल में सदियाँ बदल गयीं कई सदियाँ एक पल में सिमटे ~~~ इस पहेली में गुम यह सोचा ज़रा फुर्सत से बैठें वक़्त को मुट्ठी में थाम उससे दो बातें करें हमने कहा: "आओ, ज़रा बैठो कुछ किस्से हमें भी सुनाओ अनकहे अनसुने... Continue Reading →

The Pen’s Plight

the night grows curious as soon as she lights the lamp she moves the chair in place with a groan and a screech it obliges she picks up the pen the ink resists the flow refuses to let go a violent jerk forces it to action half-hearted, the pen gives into submission but only to... Continue Reading →

वो भी क्या दिन थे …

वो भी क्या दिन थे जब लालच खिलौनों से ज़्यादा एक अठन्नी की होती थी जब उस एक अठन्नी से सारे बाजार की सैर मज़े से होती थी वो भी क्या दिन थे जब माँ से ज़्यादा पड़ोस की चाची के लड्डू अच्छे लगते थे जब पापा की डॉंट से बचाने दादाजी बहाने बना दिया... Continue Reading →

जिस दिन उसने …

तड़पती तरसती उन निगाहों ने मुस्कुराना छोड़ दिया जिस दिन उसने अपना घर, अपना देश अपना आँगन छोड़ दिया ठहरती फिसलती उन क़दमों ने खुशियां ढूँढना छोड़ दिया जिस दिन उसने अपना घर, अपना देश अपना आँगन छोड़ दिया रोती सिसकती उन आँखों ने सपने देखना छोड़ दिया जिस दिन उसने अपना घर, अपना देश... Continue Reading →

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