मत कहो…

मत कहो यह किस्मत की बात है... जहां बारातों में हज़ारों के निवाले कूड़े दान को खिलाये जा रहे हैं पर एक पिता अपने परिवार को दो वक़्त की रोटी तक को खून बहा रहा है मत कहो यह किस्मत की बात है... की बंद घरों में दीवारों पे लटकी तसवीरें घंटो ऐसी का हवा... Continue Reading →

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कभी जो…

कभी जो नज़रें मिलीं पलकें झुका न लेना कभी जो मेरी यादों ने दस्तक दी उन्हें ठुकरा न देना उम्मीद लिए देहलीज़ पर खड़ा हूँ इस इंतज़ार में कब मेरी गली से गुज़रोगे कभी जो मेरी आवाज़ सुनो अजनबी कहकर मेरा शहर छोड़ न देना ~~~~~ आशा सेठ

The Knowing

flowers bloomed carefree looking here laughing there as the day slithered from dawn to dusk some of those flowers turned pale their end was their the next morning was not for them ~~~~~ Asha Seth

Nomad

she eclipsed his nomad soul from the storms of  self despair Follow @themusingquill on Instagram for more poetry. I await you there. 🙂 ~~~~~ Asha Seth      

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